Saturday, May 31, 2008

जो ब्लॉगर अपने लिखे शब्दों से प्यार करते हैं, उनके लिये सूचना!

आपको यह जानकर शायद अच्छा लगे कि आर्ट ऑफ़ रीडिंग में हम एक नया फ़ीचर जोडने जा रहे हैं.
हमने यह ब्लॉग बनाया ही इसलिये है कि आप छपे हुए शब्दों की ध्वन्यात्मक सुंदरता से दो चार हो सकें. इस दिशा में हम अपनी कारोबारी व्यस्तताओं और प्रोडक्शंस के थकाऊ चक्करों के बीच अपने मन की तरंग का काम उसी तरह करते रहेंगे जैसा आप अभी तक देखते-सुनते आए हैं. हमें अपनी साहित्यिक धरोहर के अनमोल मोतियों से दिली लगाव है और नितांत निजी कारणों और रुचियों से हम इस ख़ज़ाने के मोती आपके सामने रखते रहेंगे. संयोग से ये आपको भी अच्छे लगेंगे तो हम समझेंगे कि "हमारी और आपकी राय कितनी मिलती-जुलती है!"

हाँ तो मैं एक नये फ़ीचर की बात कर रहा था. दरअस्ल ये नया फ़ीचर हमारे आपके प्यारे क़िस्सागो मुनीश मयख़ानवी के दिमाग़ की उपज है. हम दोनो एक दोपहर पीपल के एक पेड के नीचे सिगरेट से धुआँ उडाते हुए इस बात पर सहमत हुए कि यार लोग इतनी अच्छी-अच्छी पोस्टें अपने-अपने ब्लॉग्स पर लिखते हैं लेकिन कई बार ब्लॉग परिवार में मची हलचलों या ऐसे ही कुछ नामाक़ूल कारणों से वो पोस्टें इतनी तवज्जो नहीं हासिल कर पातीं, जिनकी वो हक़दार होती हैं, तो क्यों न हम ऐसी पोस्टों को चुनें और उन्हें आर्ट ऑफ़ रीडिंग में पॉडकास्ट की शक्ल में पेश करें!
तो अब तक की तय स्कीम के मुताबिक़ हम आज के ही दिन, यानी संडे को ऐसे पॉडकास्ट जारी करेंगे जो सीधी भाषा में कहें तो आपमें से ही चुने हुए ब्लॉगर साहबान की किसी पोस्ट की ध्वन्यात्मक प्रस्तुति होगी.

तो उम्मीद कीजिये कि आप अगले हफ़्ते आज के ही दिन अपनी किसी पोस्ट को सुन रहे होंगे, लेकिन फ़िलहाल मुनीश से सुनिये उर्दू अफ़सानानिगार रामलाल का अफ़साना अंधेरे से अंधेरे की तरफ़. अवधि साढे सात मिनट.

22 comments:

alpana said...

bahut achcha qadam...

aap ki pahli hi prastuti bahut achcheehai...train ki awaz --aur manish ji ki damdaar,clear awaz ne lekh mein jaan daal di hai...bahut hi achchee recording aur prastuti hai.
Irfaan ji manish ji aur ramlal ji ko badhayee.
aagey ke podcasts ka intzaar rahega.
shubh kamnayen..

alpana verma

Sanjeet Tripathi said...

बहुत खूब!
क्या आईडिया लाए हो साहिब, मान गए!

sanjay patel said...

बिलकुल ताज़ा प्रयोग होगा ये. ये हक़ीक़त है कि जब हम लिख रहे होते हैं तो इस बात का अंदाज़ नहीं होता कि ध्वनि के पसेमज़र आपकी कॉपी का क्या वज़्न है.वाचिक परम्परा में ये काम हौसला-अफ़ज़ाई की दरकार रखता. जारी किये अफ़साने में ऊँचा पिच तो साफ़ सुनाई दिया लेकिन जहाँ एक जुमला ख़त्म हुआ चाहता था वहाँ पिच नीचा होने (संगीत की ज़ुबान में कहूँ तो खरज में)होने से सुनाई नहीं दे रहा था...लेकिन यूँ ख़ूब अच्छा पढ़ा गया ये अफ़साना.इंतज़ार रहेगा इस फ़ीचर में जुड़ने वाले स्वर-चिट्ठों का. आदाब !

शायदा said...

अरे वाह, यही बात तो मैं सोच रही थी कई दिन से कि ब्‍लॉग की पोस्‍टों पर भी ऐसा प्रयोग क्‍यों नहीं किया जा सकता, बस कहूं या न कहूं के चक्‍कर में थी। ख़ैर बहुत अच्‍छा आइडिया है, हम इंतज़ार कर रहे हैं अगले संडे का। और हां, ये धड़धड़ाती हुई कहानी भी बढि़या रही।

vijay gaur said...

intjar rahega. idea pasand aya, ummid hai excute bhi ache se hi karoge. uske baad hi kuch kahana sambhaw hoga. filhal shubhkamnain.

Rajesh Roshan said...

क्या नायाब कदम है, वाह

जुड़िये गँठजोड़ मित्र समुदाय से! (gathjod.com) said...

आपकी ध्वन्यात्मक प्रस्तुति बहुत ही मनमोहक है!

मीत said...

बहुत बढ़िया सोच. हम इंतज़ार कर रहे हैं.

anubhuti said...

हमें भी इंतजार है, धुऑं की जानदार प्रस्तुति के लिये भी बधाई स्वीकारें ।

विजयशंकर चतुर्वेदी said...

मेरा नंबर कब आएगा?

विजयशंकर चतुर्वेदी said...

इसी सन्डे को मेरा वाला सुनाई दे जाना चाहिए! वरना उसी पीपल के पेड़ के नीचे आकर सिगरेट सहित दोनों बंधुन को रामपुरी चाकू की नोक पर उठवा लूंगा और बरगद तले बिठा दूंगा!.और हाँ, इसे धमकी क्रमांक-1 की तरह लीजिये. @#&!$$$$

Udan Tashtari said...

बहुत उम्दा एवं सार्थक कदम, स्वागत है. अनेकों शुभकामनाऐं.

बाल किशन said...

बहुत उम्दा एवं सार्थक कदम, स्वागत है. अनेकों शुभकामनाऐं.
ये प्रयोग निश्चय ही एक बहुत बड़ा हिट और सबके लिए हित का साबित होगा.

Raviratlami said...

आपसे गुज़ारिश है, मैंने पहले भी कहा था - थोड़ी सी अतिरिक्त परेशानी तो होगी, एमपी3 डाउनलोड की कड़ी भी दें. हमारे जैसे बहुत से लोग इन्हें डाउनलोड कर फुर्सत में या जब यात्रा कर रहे होते हैं तो मोबाइल प्लेयरों के जरिए सुनते हैं.

munish said...

shukriya saahebaan!

munish said...

Sanjay ji u r right, noise of train is overpowering narrator's voice. I'll request our technicians to lower the pitch of train. thanx.

मीनाक्षी said...

kayee dinoin se hum sirf reading hi kar rahain hain so Art of reading ka heading dekha to chale aaye...lekin rochak aur naya pryaas man ko moh gaya. humaari shubhkamnayain..!

vimal verma said...

shandaar prayog hai bhaai,damdaar post ke liye bahut bahut badhaaee

Pratyaksha said...

य़े तो खूब रहेगा ....

इरफान said...

Dear Sanjay,
Please check the track again, it is satisfactory I beleive.

sanjay patel said...

Yes; its upto the mark. I think my speaker set was bit problemetic.
best wishes irfan bhai.

Satish Yadav said...

कहानी दमदार है।