Sunday, May 25, 2008

केशव अनुरागी


मंगलेश डबराल की कविता केशव अनुरागी बीते बरसों में ख़ासा चर्चा में रही. सुनिये उन्हीं की आवाज़ में केशव अनुरागी.यह कविता कोई पाँच साल पहले मैंने दिल्ली में मंगलेशजी के घर पर कई दूसरी कविताओं के साथ रिकॉर्ड की थी. अवधि कोई तीन मिनट है. पोस्ट प्रोडक्शन भी मैंने ही किया है.

4 comments:

vijay gaur said...

इरफ़ान भाई निश्चित ही अपने आप में विशिष्ट है आपका ये काम तो. जहां एक ओर लोग चकलस में व्यस्त हैं, ऎसे में आपके काम को देखना और सुनना सुकून दे रहा है. बधाई आपको भी और मंगलेश जी को भी, उनकी खुद की आवाज में कविता को सुनना एक दुर्लभ अनुभव है.

सुभाष नीरव said...

बधाई इरफान भाई, इस अद्भुत प्रयोग के लिए। मंगलेश जी की कविता "केशव अनुरागी" को उनके स्वर में सुनना अच्छा लगा।

Satish Yadav said...

कविता कुछ ज्यादा जमी नहीं। हो सकता है कि मेरे समझने मे कुछ कमी हो , या कुछ और लेकिन मेरा मत तो यही है। आगे और कविताऐं सुनू तो शायद बेहतर जान सकूं।

अंगूठा छाप said...

bahut adhbhut hai bhai aapka kaarnama...



wakai!!