Friday, July 25, 2008

सुनिये अमृता प्रीतम की "रसीदी टिकट" से एक हिस्सा


अमृता प्रीतम हर किसी की ज़िंदगी के एक मोड पर कहीं न कहीं शामिल होती हैं और कुछ अनचीन्हा सा छोड जाती हैं या कहें जोड जाती हैं. पेश करता हूँ "रसीदी टिकट" से एक हिस्सा.

12 comments:

रंजना [रंजू भाटिया] said...

bahut behtreen aaj aapne mera din khushnuma bana diya ,,itni baar padha par yah anubhav itna anutha hai ki mere rongate khade ho gaye bahut hi acchi avaaz hai par kahin kahin koi sentences bahut jaldi padhe gaye ,,aap mere blog amrita ki yaad mein se kuch padh sake to mujhe bahut khushi hogi ..bahut bahut shukriya

ई-स्वामी said...

बहुत बहुत बहुत बहुत शुक्रिया!
शुरु में लगा था की एक स्त्री की बातें पुरुष की वाणी में कैसी लगेंगी ... लेकिन आपकी प्रस्तुति ने तो मंत्रमुग्ध कर दिया!

अंगूठा छाप said...

यकीन जानिए इरफान साहब हाथ के तमाम काम रोकने पड़ते हैं जब आर्टआॅफरीडिंग की हूक कानों में पड़ती है। आप बिलाशक बहुत-बहुत महत्वपूर्ण काम को अंजाम दे रहे हैं।


अल्लाह आपको बरकत दे! आमीन!

शोभा said...

बहुत ही सुन्दर । जब पढ़ा था तब भी अच्छा लगा था और आपकी आवाज़ में सुनकर और अधिक आनन्द आया। आपने शब्दों को बहुत सुन्दर वाणी प्रदान की है। अमृता जी की इस सुन्दर कृति का आस्वादन कराने के लिए धन्यवाद।

Parul said...

in dino NA RADHA NA RUKMANI padh rahi huun..aur aisey me amrita ko is lehze me sun naa...zaykaa badh gaya..aabhaar

Udan Tashtari said...

गजब भाई!!! आनन्द आ गया...बहुत खूब!!

Ashok Pande said...

एक के बाद एक कमाल रचनाएं लगा रहे हैं उस्ताद आप. बहुत सुन्दर.

Manish Kumar said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति...

मीनाक्षी said...

आँखें बन्द करके सिर्फ सुनना अजब सा सुकून दे गया... बहुत बहुत आभार

शायदा said...

बहुत सुंदर। बहुत नम।

poemsnpuja said...

aawaz mein jaise ek ajeeb sa jadoo hai, jaise kabhi man nahin bharega, sare thahrav sahi aur kahani ko bayan karne ka andaz bilkul roohani.
background music bilkul apt...this is going to be a habit,i know.
amazing blog.keep it running

धीरज चौरसिया said...

बहुत ही बेहतरीन प्रस्तुती, सच पुछीये तो दिल खुश हो गया, ईश्वर ने आपको ईस बेहतरीन कला से नवजा है ईसे ऐसे ही बटते रहे| धन्यवाद
धीरज चौरसिया