Thursday, May 22, 2008

बंदर चढा है पेड पर...


बंदर चढ़ा है पेड़ पर करता टिली-लिली...
सुनिये दिनेश कुमार शुक्ल की एक और कविता. दिनेश जी की एक कविता आप यहां पहले भी सुन चुके हैं.


यहां प्ले को चटकाएं और कविता सुनें.

3 comments:

Satish Yadav said...

वाह , दिल खुश कर दिया...बहुत खूब। सीधे सरल शब्द और सरल प्रस्तुतिकरण ....जारी रखें।

maithily said...

पी छाछ हमने फूंक कर फिर जीभ क्यों जली!
शानदार

सतीश said...

आज फिर ईसे सुना....क्या कहूं....फिर मजा आ गया..हर लाईन से बहुत पुख्ता बात कह रहे हैं, दिनेशजी की कोई और रचना हो तो उसे भी सुना दिजिऐ...अच्छा लगा।