
अमृता प्रीतम का प्यार कितनी तहों से झाँकता है और कितनी परतें उसे ढँकने आती हैं...ये बात रसीदी टिकट पढते हुए बख़ूबी समझी जा सकती है...एक पिछडे और वर्जनाओं से भरे समाज में अमृता प्रीतमों की शरणगाह शब्द हैं जो साहित्य होकर भी साहित्य की मान्यताओं के सामने रोडे अटकाते हैं. सुनिये सज्जाद ज़हीर से अमृता प्रीतम की वाबस्तगी का दर्द-
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