Sunday, June 15, 2008

सुनिये त्रिलोचन की एक ग़ज़ल

ग़ज़ल के शुरू में आवाज़ ज्योत्सना तिवारी की है और ग़ज़ल पेश कर रहे हैं पंकज श्रीवास्तव

त्रिलोचन की ग़ज़ल "आप कहते हैं तो अपनी भी सुना देता हूँ मैं"



5 comments:

ब्‍लॉग... ब्‍ला... ब्‍ला... ब्‍ला... said...

आप नंबर वन हैं। आपको बधाई। देखें http://onetwokaten.blogspot.com/2008/06/blog-post.html

Udan Tashtari said...

पंकज की आवाज गहरी है. आभार सुनाने के लिए.

Dr. Chandra Kumar Jain said...

बेशक यह मंच घोर तम के देश में
दीपक जला रहा है.....पढने की कला के दीपक.
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मौजूदा ग़ज़ल
त्रिलोचन जी की तरह ही गहरी है.
ऐसी शुद्ध साहित्यिक रचना को आवाज़ से
आपने हम सब तक पहुँचाया,
यह स्वागतेय है और वन्दनीय भी.
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बधाई
डा.चंद्रकुमार जैन

मुनीश ( munish ) said...

Congrats for being number one. Lets have champagne!!

Satish Yadav said...

अच्छा लगा ।