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सोचो तो

गोरख पांडेय की कविता इरफ़ान की आवाज़ में. जन संस्कृति मंच द्वारा जारी ऑडियो बुक 'आएंगे अच्छे दिन' से

कैथरकला की औरतें

गोरख पांडेय की कविता पूनम श्रीवास्तव की आवाज़ में. जन संस्कृति मंच द्वारा जारी ऑडियो बुक 'आएंगे अच्छे दिन' से

'तुम्हें डर है' और 'उनका डर'

गोरख पांडेय की दो कविताएं शरद तिवारी की आवाज़ में. तुम्हें डर है उनका डर जन संस्कृति मंच द्वारा जारी ऑडियो बुक 'आएंगे अच्छे दिन' से

हे भले आदमियो

गोरख पांडेय की कविता अतुल आर्य की आवाज़ में. जन संस्कृति मंच द्वारा जारी ऑडियो बुक 'आएंगे अच्छे दिन' से

बच्चों के बारे में

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गोरख पांडेय की कविता अतुल आर्य की आवाज़ में. जन संस्कृति मंच द्वारा जारी ऑडियो बुक 'आएंगे अच्छे दिन' से

आँखें और ज़मींदार सोचता है

गोरख पांडेय की कविताएं अश्विनी वालिया की आवाज़ में. जन संस्कृति मंच द्वारा जारी ऑडियो बुक 'आएंगे अच्छे दिन' से

बंद खिड़कियों से टकराकर

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गोरख पांडेय की कविता पूनम श्रीवास्तव की आवाज़ में. जन संस्कृति मंच द्वारा जारी ऑडियो बुक 'आएंगे अच्छे दिन' से.

सुनिये अमृता प्रीतम की "रसीदी टिकट" से एक हिस्सा

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अमृता प्रीतम हर किसी की ज़िंदगी के एक मोड पर कहीं न कहीं शामिल होती हैं और कुछ अनचीन्हा सा छोड जाती हैं या कहें जोड जाती हैं. पेश करता हूँ "रसीदी टिकट" से एक हिस्सा. Voice and presentation: Irfan Dur: 10 Min Approx

एक दिन आता है!

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सुनिये रघुवीर सहाय की कविता "एक दिन आता है"। आवाज़ इरफ़ान की है। अवधि एक मिनट। डाउनलोड लिंक । इमेज : साभार किमतेलास

किताब पढकर रोना

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रोया हूं मैं भी किताब पढकर के पर अब याद नहीं कौन-सी शायद वह कोई वृत्तांत था पात्र जिसके अनेक बनते थे चारों तरफ से मंडराते हुए आते थे पढता जाता और रोता जाता था मैं क्षण भर में सहसा पहचाना यह पढ्ता कुछ और हूं रोता कुछ और हूं दोनों जुड गये हैं पढना किताब का और रोना मेरे व्यक्ति का लेकिन मैने जो पढा था उसे नहीं रोया था पढने ने तो मुझमें रोने का बल दिया दुख मैने पाया था बाहर किताब के जीवन से पढ्ता जाता और रोता जाता था मैं जो पढ्ता हूं उस पर मैं नही रोता हूं बाहर किताब के जीवन से पाता हूं रोने का कारण मैं पर किताब रोना संभव बनाती है. रघुवीर सहाय आवाज़ : इरफ़ान ........ अवधि : लगभग डेढ मिनट

नंगी आवाज़ें

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मंटो की कहानियाँ मेहनतकश जनता के मनोजगत का दस्तावेज़ भी हैं. सुनिये नंगी आवाज़ें और महसूस कीजिये उस मानवीय करुणा का ताप, जिसे बाहर रहकर पेश कर पाना बडे जिगरे का काम है. शुरुआत में आवाज़ें अरशद इक़बाल और मुनीश की हैं. क़िस्सागो : इरफ़ान Duration: 20 Min.