Thursday, July 10, 2008

काँटे और याद


सुनिये त्रिलोचन की एक कविता "काँटे और याद"
आवाज़ रजनीश मिश्र की है.

3 comments:

मीनाक्षी said...

आँखें बन्द करके सुनना और महसूस करना..यह बहुत खूबसूरत एहसास है..शुक्रिया..

Lavanyam - Antarman said...

बहोत खूब ..
- लावण्या

सतीश पंचम said...

अच्छे संगीत और आवाज के साथ मनमोहक कविता - बहुत सुंदर....उम्दा।